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ममता को बड़ा सियासी झटका! मुर्शिदाबाद में TMC के 9 में से 8 विधायक हुए बागी खेमे में शामिल, बढ़ी मुश्किलें

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी उथल-पुथल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी में चल रहे विद्रोह के दौरान बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक विधायक भी बागी खेमे के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। मुर्शिदाबाद जिले से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीतकर आए 9 विधायकों में से 8 ने कथित तौर पर ममता बनर्जी का साथ छोड़कर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का समर्थन कर दिया है।

राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि पार्टी के कई पुराने और प्रभावशाली चेहरे भी बागी खेमे में शामिल हो गए हैं। इनमें लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के भरोसेमंद नेता माने जाने वाले जावेद खान और काजल शेख जैसे नाम शामिल हैं।

बागी विधायकों को मिली बड़ी जिम्मेदारियां

सूत्रों के अनुसार बागी गुट ने अपने साथ आए नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। जावेद खान को विधानसभा में विपक्ष का उपनेता बनाया गया है, जबकि अखरुज्जमां को मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी दी गई है।

बताया जा रहा है कि पूर्व मंत्रिमंडल के चार अल्पसंख्यक मंत्री भी बागी विधायकों के समूह में शामिल हैं। इनमें जावेद खान, सबीना यास्मीन, गुलाम रब्बानी और अखरूजमां के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं।

34 मुस्लिम विधायकों में से 17 ने बदला पाला

रिपोर्ट के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाले 34 मुस्लिम विधायकों में से 17 विधायक अब बागी गुट का हिस्सा बन चुके हैं। यह आंकड़ा पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

बागी खेमे से जुड़े जिन प्रमुख अल्पसंख्यक विधायकों के नाम सामने आए हैं, उनमें जावेद खान, अखरूजमां, काजल शेख, गुलाम रब्बानी, डॉ. मोशर्रफ हुसैन, इमानी बिस्वास, नियामत शेख, रेयात हुसैन, गुलशन मल्लिक, तौसीफुर रहमान, मुस्तफिजुर रहमान और बहारुल इस्लाम शामिल बताए जा रहे हैं।

मुर्शिदाबाद में सबसे बड़ा झटका

मुर्शिदाबाद जिले को तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन अब यही इलाका पार्टी नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। जिले के 9 अल्पसंख्यक विधायकों में से 8 के बागी गुट में शामिल होने से राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

अखरुज्जमां ने दावा किया है कि मुर्शिदाबाद के अधिकांश विधायक उनके साथ हैं और उन्होंने बहुमत वाले खेमे का समर्थन करने का फैसला किया है। जिले से केवल जलंगी के विधायक और शिक्षाविद बाबर अली ही ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ खड़े बताए जा रहे हैं।

विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक हालात

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने मुर्शिदाबाद जिले की 22 में से 20 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उस समय जिले को पार्टी का सबसे मजबूत क्षेत्र माना जाता था।

हालांकि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद स्थिति तेजी से बदली है। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों ममता बनर्जी के आवास पर आयोजित विधायक दल की बैठक में कई विधायक अनुपस्थित रहे, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलें और तेज हो गईं।

मुस्लिम वोट बैंक को लेकर भी बढ़ी चिंता

पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्ष 2011 से मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा वर्ग तृणमूल कांग्रेस का समर्थक माना जाता रहा है। लेकिन वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम ने पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक और संगठनात्मक मजबूती को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बागी विधायकों की बढ़ती संख्या को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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