उत्तर प्रदेशराज्य

मजदूरी से लेकर लंदन तक का सफर: बहराइच की नैना को किंग चार्ल्स ने किया सम्मानित, संघर्ष की कहानी बनी मिसाल

बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की रहने वाली नैना ने संघर्ष, मेहनत और हौसले के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। आर्थिक तंगी के बीच खेतों में मजदूरी कर और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई जारी रखने वाली नैना को अब लंदन में सम्मानित किया गया है। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और महारानी कैमिला से मुलाकात का अवसर मिलने के बाद नैना की कहानी पूरे इलाके में प्रेरणा बन गई है।

रिसिया ब्लॉक के पटेल नगर गांव की रहने वाली नैना का बचपन कठिनाइयों में बीता। पिता विजय बहादुर राजगीर मिस्त्री हैं, जबकि मां सोना देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद नैना के भीतर पढ़ाई को लेकर गहरी लगन थी, लेकिन आर्थिक हालात बार-बार उनके रास्ते में बाधा बनते रहे।

खेतों में मजदूरी कर जारी रखी पढ़ाई

नैना ने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए गांव में मजदूरी की और बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया। उन्होंने बताया कि कई बार खेतों में काम करके पढ़ाई का खर्च जुटाना पड़ा। आर्थिक संकट इतना बढ़ गया कि 10वीं के बाद उनकी पढ़ाई छूट गई थी, लेकिन सीखने और आगे बढ़ने की जिद ने उन्हें हार नहीं मानने दी।

साल 2021 में नैना आगा खान फाउंडेशन के ‘प्रोजेक्ट लहर’ से जुड़ीं। इस परियोजना का उद्देश्य कमजोर वर्ग की युवतियों को आत्मनिर्भर बनाना है। संस्था ने नैना को छह महीने का प्रशिक्षण दिलाने के साथ उनकी आगे की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उठाई। इसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट और स्नातक की पढ़ाई अच्छे अंकों के साथ पूरी की।

अब किशोरियों को बना रहीं आत्मनिर्भर

संस्था की कोऑर्डिनेटर सीमा शुक्ला के मार्गदर्शन में नैना अब 16 से 29 वर्ष तक की किशोरियों और युवतियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने 12 युवतियों की टीम बनाकर बालिकाओं की शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम शुरू किया।

यही नहीं, नैना गांवों में बाल विवाह रोकने के लिए लगातार जागरूकता अभियान भी चला रही हैं। उनके प्रयासों का असर यह रहा कि उनकी संघर्ष और सामाजिक बदलाव की कहानी अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची।

लंदन में मिला बड़ा सम्मान

11 मई को लंदन के बकिंघम पैलेस स्थित शाही अल्बर्ट हॉल में आयोजित किंग्स ट्रस्ट समारोह में नैना को सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्हें ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और महारानी कैमिला से मिलने का अवसर भी मिला।

समारोह में अमल क्लूनी, जॉर्ज क्लूनी, शार्लोट टिलबरी, रीटा ओरा और सर रॉड स्टीवर्ड जैसी कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां भी मौजूद रहीं। नैना ने यह सम्मान उन सभी लड़कियों को समर्पित किया, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

बहराइच लौटने पर हुआ भव्य स्वागत

लंदन से लौटने के बाद बहराइच पहुंची नैना का प्रशासनिक अधिकारियों ने सम्मान किया। डीएम अक्षय त्रिपाठी और सीडीओ सुनील कुमार धनवंता ने उन्हें सम्मानित कर उनके प्रयासों की सराहना की और आगे बढ़ने के लिए हौसला बढ़ाया।

रिसिया की आरती भी बन चुकी हैं मिसाल

नैना से पहले रिसिया ब्लॉक के बभनी सैदा गांव की आरती भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हो चुकी हैं। ऑटो चलाकर संघर्ष की नई मिसाल पेश करने वाली आरती को भी आगा खान फाउंडेशन ने सहयोग दिया था।

आज रिसिया इलाके की नैना और आरती उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो कठिन हालात के बावजूद अपने सपनों को सच करने का हौसला रखती हैं।

Related Articles

Back to top button