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मोदी सरकार में इकोनॉमी को मिला बूस्टर डोज, कुछ सालों में पीछे छूट सकते हैं ये देश

नई दिल्ली: बजट 2023 की तैयारियां जोरों पर हैं. लोगों को उम्मीद है कि मोदी सरकार आर्थिक सुधारों पर आगे बढ़ सकती है. वैसे भी भारत ने 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद तेजी से तरक्की करना शुरू किया है. तब से अब तक ग्लोबल इकोनॉमी ने कई उतार-चढ़ाव देखें हैं. हर बार भारत ने बेहतर तरीके से इन समस्याओं का सामना किया है, फिर वो चाहे 2008 का वैश्विक आर्थिक संकट हो या फिर कोविड जैसी महामारी. मौजूदा मोदी सरकार के कार्यकाल में कई काम ऐसे हुए हैं जो आने वाले सालों में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना सकते हैं.

1991 के आर्थिक सुधारों ने भारत को ग्रोथ का जो वैक्सीनेशन दिया, मौजूदा मोदी सरकार के साढ़े 8 साल के कार्यकाल में उसे एक ‘बूस्टर डोज’ मिला है. 2014 में भारत दुनिया की टॉप-10 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने वाला देश बना, आज ये ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.

अगर भारत की ग्रोथ ऐसी ही बनी रही तो वो दिन दूर नहीं जब 2027 तक भारत जर्मनी को और 2029 तक जापान की इकोनॉमी को पीछे छोड़ देगा. यानी अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी होगा. इसमें मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए कई सुधार की अहम भूमिका है.

साल 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनी. तब से अब तक इस सरकार ने टैक्स से लेकर बैंकिंग सेक्टर तक और इंफ्रास्ट्रक्चर अप्रोच को बदलने से लेकर दिवाला कानून लाने तक कई बड़े काम किए हैं. इनमें 6 काम काफी अहम हैं…

माल और सेवाकर (GST): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश में 1 जुलाई 2017 से जीएसटी व्यवस्था को लागू किया. इस व्यवस्था के चलते देश के 13 लाख टैक्सपेयर्स को एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के दायरे में लाया जा सका है. इसने टैक्स सिस्टम में कई तरह के लीकेज को बंद किया और अब महीने दर महीने सरकार का कलेक्शन भी नए रिकॉर्ड बना रहा है.

बैकिंग सुधार : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में जिस सेक्टर को सबसे ज्यादा लाभ हुआ, वो रहा इंडिया का बैंकिंग सेक्टर. फंसे हुए कर्ज (NPA) के बोझ से दबे इस सेक्टर के लिए जहां सरकार ने समय-समय पर सरकारी बैंकों मेंकरीब 3 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डाली. 10 सरकारी बैंकों का विलय कर 4 मजबूत और बड़े बैंक बनाए. बैंकों के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया जारी है. वहीं एनपीए का बोझ घटाने के लिए दिवाला कानून जैसा अस्त्र बैंकों को दिया, ताकि वो अपना फंसा कर्ज वसूल कर सकें. अब बैंकों का एनपीए लेवल 6 साल के सबसे निचले स्तर 7.6 प्रतिशत पर आ गया है.

पीएलआई स्कीम (PLI Scheme): मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में सर्विस सेक्टर के साथ-साथ मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर खासा जोर दिया. इसके लिए सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ जैसा प्रोग्राम शुरू किया. पर इस प्रोग्राम को और मजबूती मिली ‘पीएलआई स्कीम’ से, इसका मकसद देश की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत को एक ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाना है. इसलिए सरकार ने बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल उपकरण और एपीआई, टेलीकॉम और सोलर सेल जैसे सेक्टर को इंसेंटिव देकर उनके घरेलू विनिर्माण और सप्लाई चेन की दिक्कतों को दूर करने की योजना बनाई है, जो कहीं ना कहीं चीन को मात देने वाली साबित होगी.

यूपीआई (UPI): भारत ने यूपीआई जैसा पेमेंट सिस्टम मोदी सरकार के कार्यकाल में ही विकसित किया. इस अनोखे टूल की वजह से देश में डिजिटल पेमेंट आसान हुआ. यूपीआई से देशभर में अब तक 19.65 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो चुके हैं, जिनका मूल्य 32.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. अब भारत ‘डिजिटल रुपी’ को भी पायलट बेसिस पर लॉन्च कर चुका है, जिससे डिजिटल पेमेंट को और विस्तार मिलने की उम्मीद है.

जनधन-आधार-मोबाइल (JAM): इस पूरे कॉन्सेप्ट का प्रस्ताव पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण 2014-15 में रखा गया था. मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों में से ये एक अहम सुधार है. इन तीनों के समागम से जहां सरकार को आर्थिक समावेशन करने में मदद मिली. वहीं सरकारी सब्सिडी के बड़े लीकेज को खत्म करने का काम भी हो सका. इतना ही नहीं आधार के वजह से टैक्स चोरी को रोकने में भी मदद मिल रही है. जैम की वजह से ही कोविड महामारी के समय में सरकार को एक बड़ी आबादी तक राशन और अन्य आर्थिक सहायता पहुंचाने में मदद मिली, तो वहीं उज्ज्वला जैसी योजना को कम समय पर जमीन पर लागू किया जा सका.

गतिशक्ति कार्यक्रम : मोदी सरकार ने अक्टूबर 2021 में पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान लॉन्च किया था. ये देश में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए एक होलिस्टिक अप्रोच लाने वाला कार्यक्रम है. सरकार के मुताबिक इससे देश के इंफ्रा सेक्टर में 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है. ये लॉजिस्टिक ईज को सुनिश्चित करेगा, जो भारत को एक बड़ी इकोनॉमी बनाने में गेम चेंजर होगा.

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