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होर्मुज रूट पर फिर लौटेगा भारत! युद्ध के बाद पहली बार तेल लाने भेजे जाएंगे जहाज, सुरक्षा संभालेगी नेवी

मुंबई: ईरान युद्ध के बाद लंबे समय से प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग पर भारत एक बार फिर अपने तेल पोत भेजने की तैयारी में जुट गया है। अगर केंद्र सरकार की योजना को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार होगा जब भारतीय जहाज इस संवेदनशील समुद्री रास्ते से कच्चा तेल लेकर देश लौटेंगे। मिशन की सुरक्षा को देखते हुए भारतीय नौसेना को भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार, सार्वजनिक तेल कंपनियों और शिपिंग एजेंसियों के बीच इस मसले पर लगातार उच्चस्तरीय बैठकें चल रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरी रणनीति लगभग तैयार है और अंतिम मंजूरी मिलते ही जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है। हालांकि सुरक्षा कारणों से फिलहाल तेल की मात्रा और संचालन की समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।

नौसेना की मंजूरी का इंतजार

जानकारी के अनुसार सरकारी शिपिंग कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया फारस की खाड़ी में अपने पोत भेजने के लिए तैयार है। कंपनी को अब भारतीय नौसेना से सुरक्षा मंजूरी और रिफाइनरियों से व्यावसायिक आदेश मिलने का इंतजार है।

बताया जा रहा है कि संभावित खतरे को देखते हुए नौसेना जहाजों की एस्कॉर्टिंग, निगरानी और समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार कर रही है।

दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है होर्मुज

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल माना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के जरिए होने वाली लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। लेकिन ईरान युद्ध और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद यहां तेल परिवहन लगभग ठप पड़ गया था।

भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति गंभीर चुनौती बन गई थी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा अब भी आयात पर निर्भर करता है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए सरकार की नई रणनीति

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने उच्च जोखिम वाले समुद्री इलाकों के लिए विशेष समुद्री बीमा योजना भी शुरू की है। इसका उद्देश्य भारतीय जहाजों और तेल कार्गो को अतिरिक्त सुरक्षा देना है, ताकि वैश्विक संकट के बीच भी सप्लाई चेन बाधित न हो।

हालांकि भारत ने पिछले कुछ महीनों में रूस समेत अन्य देशों से तेल खरीद बढ़ाई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व अब भी भारत के लिए सबसे सस्ता और तेज विकल्प बना हुआ है।

मध्य पूर्व से तेल खरीद ज्यादा किफायती

ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक मध्य पूर्व से तेल मंगाने में परिवहन लागत कम आती है और सप्लाई समय भी अपेक्षाकृत कम लगता है। दूसरी तरफ दूरस्थ देशों से तेल खरीदने पर खर्च और समय दोनों बढ़ जाते हैं।

इसी वजह से जोखिमों के बावजूद भारत एक बार फिर होर्मुज रूट को सक्रिय करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

अरब सागर में बढ़ी नौसेना की निगरानी

इस बीच भारतीय नौसेना ने अरब सागर और आसपास के संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में निगरानी और गश्त बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि भारतीय जहाजों को किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखा जा सके।

रूसी तेल पर भी बना हुआ दबाव

दूसरी ओर रूस से तेल खरीद को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने सीमित राहत देते हुए पहले से टैंकरों में लोड रूसी कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति दी है।

माना जा रहा है कि वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के बीच भारत अब अपनी तेल आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए कई विकल्पों पर एक साथ काम कर रहा है।

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