मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती में बड़ा बदलाव, अब सिर्फ एक परीक्षा से मिलेगी सरकारी नौकरी

भोपाल: मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार अब शिक्षक भर्ती में लागू दोहरी परीक्षा प्रणाली खत्म करने की तैयारी में है। नई व्यवस्था के तहत अब उम्मीदवारों को अलग से चयन परीक्षा नहीं देनी होगी। केवल शिक्षक पात्रता परीक्षा के आधार पर ही भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

स्कूल शिक्षा विभाग ने इस नई प्रणाली को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ESB) के लिए “कनिष्ठ सेवा संयुक्त परीक्षा नियम-2026” का प्रारूप तैयार किया जा चुका है। संभावना जताई जा रही है कि अगले एक महीने के भीतर नए नियम लागू कर दिए जाएंगे। इसकी शुरुआत जुलाई और अगस्त में आयोजित होने वाली माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षाओं से हो सकती है।

खत्म होगी दो चरणों वाली परीक्षा व्यवस्था

अब तक उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती में अभ्यर्थियों को पहले पात्रता परीक्षा और फिर चयन परीक्षा देनी पड़ती थी। इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों को दो बार आवेदन करने के साथ अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती थी।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद भर्ती प्रक्रिया सरल हो जाएगी और केवल एक परीक्षा के अंकों के आधार पर मेरिट तैयार कर नियुक्तियां की जाएंगी।

वर्ष 2018 में आयोजित उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षक भर्ती में भी एकल परीक्षा प्रणाली लागू की गई थी, जिसके तहत करीब 21 हजार पदों पर भर्ती हुई थी। हालांकि बाद में शिक्षक भर्ती-2023 और प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2024 में दोबारा दो चरणों वाली प्रणाली लागू कर दी गई थी। अब विभाग फिर से पुरानी एकल परीक्षा व्यवस्था लागू करने जा रहा है।

सरकारी स्कूलों के लिए स्कोर कार्ड दो साल तक मान्य

नई व्यवस्था के अनुसार सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए जारी स्कोर कार्ड की वैधता दो वर्ष तक रहेगी। यदि इस अवधि में उम्मीदवार को नियुक्ति नहीं मिलती है तो उसे दोबारा परीक्षा देनी होगी।

भर्ती प्रक्रिया के तहत विभागीय पोर्टल पर रिक्त पदों की जानकारी जारी की जाएगी और मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा।

निजी स्कूलों में भी पात्रता परीक्षा जरूरी

राज्य के निजी स्कूलों में भी अब केवल पात्रता परीक्षा पास उम्मीदवारों की ही नियुक्ति की जा सकेगी। हालांकि निजी स्कूल किसी भी वर्ष की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को नियुक्त कर सकेंगे।

निजी विद्यालयों के लिए पात्रता परीक्षा का स्कोर कार्ड आजीवन वैध रहेगा।

अभ्यर्थियों को मिलेगी आर्थिक राहत

नई व्यवस्था लागू होने से लाखों अभ्यर्थियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। पहले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को पात्रता परीक्षा और चयन परीक्षा दोनों के लिए अलग-अलग 500 रुपये शुल्क देना पड़ता था।

हर साल करीब पांच से छह लाख अभ्यर्थी इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। अब एक ही परीक्षा होने से उम्मीदवारों का समय और पैसा दोनों बचेंगे।

स्कोर सुधारने का भी मिलेगा मौका

ईएसबी अधिकारियों के मुताबिक नई प्रणाली में उम्मीदवारों को भविष्य में अपना स्कोर सुधारने का अवसर भी मिलेगा। यदि कोई अभ्यर्थी बेहतर अंक हासिल करना चाहता है तो वह दोबारा परीक्षा देकर अपना स्कोर सुधार सकेगा।

स्कूल शिक्षा विभाग के संचालक केके द्विवेदी ने कहा कि अब शिक्षक भर्ती के लिए केवल पात्रता परीक्षा होगी, अलग से चयन परीक्षा नहीं ली जाएगी। उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों को स्कोर सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा देने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।

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