हथियारी नक्सली गए, अब मौका तलाश रहे दिमागी नक्सली; लालकिले से PM मोदी ने देश को किया सावधान

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद और माओवाद के लंबे दौर का जिक्र करते हुए कहा कि देश से हथियारी नक्सली ताकतें कमजोर हुई हैं, लेकिन दिमागी नक्सली अब भी मौके की तलाश में हैं। उन्होंने देशवासियों को ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत बताई।
चार दशकों तक नक्सलवाद ने देश के बड़े हिस्से को प्रभावित किया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद और माओवाद ने देश के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में रखा। उनके मुताबिक, इस हिंसा ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया और अनेक परिवारों से उनके नौजवान छीन लिए। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने कई माता-पिता के सपनों को भी तोड़ दिया।
बंदूक के दम पर संविधान को चुनौती देने का आरोप
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद ने करीब चार दशकों तक हिंदुस्तान के एक बड़े हिस्से को दबोचकर रखा और लोगों को बंदूक की नोक पर रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान संविधान की भी धज्जियां उड़ाई गईं। पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में दशकों पुरानी चुनौतियों को समाप्त करना जरूरी है।
साढ़े 3 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद
पीएम मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षाबलों की कुर्बानी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के लोगों की रक्षा करते हुए साढ़े 3 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों के जवान शहीद हो गए। प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के कारण हुई इस बड़ी क्षति को भी अपने संबोधन में सामने रखा।
जंगल से नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी दिमागी नक्सलियों से खतरा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें ले रहा है। उन्होंने कहा कि जंगलों से नक्सली गतिविधियां कमजोर होने के बावजूद दिमागी नक्सली अभी भी मौके की तलाश में हैं। पीएम मोदी ने देश को ऐसे तत्वों को पहचानने और उनसे सावधान रहने की जरूरत बताई।



