
नई दिल्ली: डायबिटीज के मरीजों के लिए संतुलित आहार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सही खान-पान न केवल ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, बल्कि शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी उपलब्ध कराता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सभी ड्राई फ्रूट्स डायबिटीज के मरीजों के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होते। ऐसे में सही मात्रा और सही विकल्प का चुनाव करना जरूरी है।
काजू का सीमित मात्रा में करें सेवन
काजू में हेल्दी फैट, प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। सीमित मात्रा में इसका सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है और संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन से अतिरिक्त कैलोरी मिल सकती है, इसलिए संयम जरूरी है।
पिस्ता भी हो सकता है बेहतर विकल्प
पिस्ता फाइबर, प्रोटीन, पोटैशियम, आयरन, कैल्शियम, जिंक और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियंत्रित मात्रा में पिस्ता खाने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है, जिससे ब्लड शुगर को संतुलित रखने में सहायता मिल सकती है।
अखरोट दिल और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद
अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। कई शोधों में नियमित और सीमित मात्रा में अखरोट के सेवन को बेहतर हृदय स्वास्थ्य और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम में कमी से जोड़ा गया है। इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है।
बादाम को भी डाइट में करें शामिल
बादाम फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सीमित मात्रा में बादाम का सेवन भोजन के बाद ब्लड शुगर में होने वाली तेजी से बढ़ोतरी को कम करने में मदद कर सकता है। भीगे हुए बादाम का सेवन भी कई लोग अपनी डाइट में शामिल करते हैं।
इन ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें सावधानी से
डायबिटीज के मरीजों को किशमिश, अंजीर, छुहारा और खजूर जैसे प्राकृतिक रूप से अधिक मीठे ड्राई फ्रूट्स का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें पूरी तरह छोड़ देना चाहिए, बल्कि इनका सेवन कुल कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी की दैनिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह पर करना चाहिए।
सिर्फ ड्राई फ्रूट्स नहीं, पूरी डाइट का रखें ध्यान
विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए केवल ड्राई फ्रूट्स पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, समय पर दवाएं, पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।



