
नई दिल्ली: देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खराब जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और बढ़ता मोटापा इस समस्या के प्रमुख कारण हैं। पिछले कुछ वर्षों में टाइप-2 डायबिटीज के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है और आने वाले समय में यह चुनौती और गंभीर हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सरल लेकिन प्रभावी आदतों को अपनाकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
भूख लगने पर ही खाएं भोजन
विशेषज्ञों के अनुसार कई लोग भूख के कारण नहीं, बल्कि तनाव, अकेलेपन, उदासी, थकान या सामाजिक कारणों से जरूरत से ज्यादा भोजन कर लेते हैं। ऐसे में हर बार कुछ खाने से पहले खुद से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि क्या वास्तव में भूख लगी है। यदि भूख महसूस नहीं हो रही है तो सिर्फ स्वाद या आदत के कारण खाने से बचना चाहिए।
शराब से बनाएं दूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शराब का सेवन भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन को प्रभावित करता है। इसके अलावा यह मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर पर असर डालकर निर्णय लेने की क्षमता और आत्म-नियंत्रण को कमजोर कर सकता है। यही वजह है कि शराब का सेवन अधिक खाने और वजन बढ़ने का कारण बन सकता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
कैलोरी की मात्रा पर रखें नजर
किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन करने से पहले उसमें मौजूद कैलोरी की जानकारी रखना जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आप अधिक कैलोरी वाला भोजन खा रहे हैं तो उसके अनुरूप शारीरिक गतिविधि और व्यायाम की योजना भी बनानी चाहिए। इससे व्यक्ति अपने खानपान को लेकर अधिक जागरूक रहता है और अनावश्यक कैलोरी लेने से बच सकता है।
खाने से पहले पिएं पानी
भोजन करने से पहले एक या दो गिलास पानी पीना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। इससे पेट कुछ हद तक भर जाता है और अधिक खाने की संभावना कम हो जाती है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलने में मदद मिलती है, मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और वजन नियंत्रित रखने में भी सहायता मिलती है।
जंक और प्रोसेस्ड फूड से करें परहेज
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रोसेस्ड और जंक फूड में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जो मोटापा और ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना चाहिए। इसके साथ ही भोजन करने के तुरंत बाद लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय थोड़ी देर टहलने की आदत विकसित करनी चाहिए, जिससे कैलोरी बर्न होने में मदद मिलती है।
मानसिक स्वास्थ्य का रखें ध्यान
अध्ययनों में पाया गया है कि डिप्रेशन और लगातार खराब मूड का संबंध मोटापे और अस्वस्थ खानपान से हो सकता है। ऐसे समय में लोगों की मीठे और अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ खाने की इच्छा बढ़ जाती है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना भी डायबिटीज से बचाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि लगातार उदासी या अवसाद महसूस हो तो विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
तनाव बढ़ा सकता है डायबिटीज का खतरा
रिसर्च के अनुसार तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है। इससे मीठा और नमकीन खाने की इच्छा बढ़ सकती है तथा शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है। खासतौर पर पेट के आसपास बढ़ने वाली चर्बी टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा सकती है। इसलिए तनाव प्रबंधन के लिए योग, ध्यान और नियमित व्यायाम जैसी गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।
जीवनशैली में छोटे बदलाव बन सकते हैं बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और स्वस्थ आदतों को अपनाकर डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय रहते जीवनशैली में किए गए छोटे-छोटे बदलाव भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।



