सम्राट चौधरी बनेंगे बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री, 56 साल पुरानी धारणा टूटेगी; कर्पूरी ठाकुर के बाद रचेंगे इतिहास

बिहार की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया अध्याय लिखने जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक में उन्हें लगातार तीसरी बार नेता चुना गया, जिसके बाद उनके नेतृत्व में एनडीए सरकार 15 अप्रैल को शपथ ले रही है। इस नई सरकार में जेडीयू से बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, जबकि मंत्रिमंडल का विस्तार आगे किया जाएगा।
56 साल पुरानी धारणा टूटेगी, डिप्टी सीएम से सीएम बनने का रिकॉर्ड
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही बिहार की राजनीति में 56 साल पुरानी एक धारणा टूट जाएगी। अब तक यह माना जाता रहा कि जो नेता उपमुख्यमंत्री बनता है, वह मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाता। लेकिन सम्राट चौधरी इस धारणा को तोड़ते हुए सीधे मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले नेता बनेंगे।
कर्पूरी ठाकुर के बाद दूसरा बड़ा उदाहरण
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना उन्हें एक ऐतिहासिक पंक्ति में खड़ा कर देगा। इससे पहले समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर ही ऐसे उपमुख्यमंत्री रहे, जिन्हें बाद में मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला था। कर्पूरी ठाकुर 1967 में उपमुख्यमंत्री बने थे और 1970 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। अब 56 साल बाद सम्राट चौधरी इस उपलब्धि को दोहराने जा रहे हैं।
बिहार में डिप्टी सीएम से सीएम तक का सफर रहा मुश्किल
आजादी के बाद बिहार में अब तक कई उपमुख्यमंत्री बने, लेकिन अधिकांश मुख्यमंत्री नहीं बन सके। कर्पूरी ठाकुर से पहले अनुग्रह नारायण सिन्हा लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहे, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। उनके बाद भी कई बड़े नाम उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंचे, लेकिन शीर्ष पद तक नहीं पहुंच सके।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर बना मिसाल
सम्राट चौधरी का यह सफर खास माना जा रहा है, क्योंकि वे दो बार उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। भाजपा विधायक दल का नेतृत्व भी उन्हें लगातार तीन बार मिला है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्य में भाजपा को सरकार का नेतृत्व करने का मौका मिला, जिसके चलते सम्राट चौधरी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भाजपा के नेतृत्व में बिहार में नई सरकार
यह पहली बार होगा जब बिहार में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार काम करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बदलाव राज्य की राजनीति में नए समीकरण और नई दिशा तय कर सकता है।



