बिहार

बिहार की राजनीति में तेज हुई हलचल: बिरौल गैंगरेप केस को लेकर आरजेडी सक्रिय, नई सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर घेराबंदी की तैयारी

दरभंगा से सामने आए एक संवेदनशील मामले ने बिहार की सियासत को गर्म कर दिया है। राज्य में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल अब पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। हाल के दिनों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को मुद्दा बनाकर पार्टी सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।

बिरौल कांड पर बनाई गई जांच समिति
दरभंगा के बिरौल थाना क्षेत्र में एक दलित किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने जांच समिति गठित की है। इस समिति को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश कार्यालय को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए।

नेताओं का दौरा, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
जांच के लिए गठित टीम में कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे, जिन्होंने न केवल पीड़ित परिवार से बातचीत की बल्कि मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर नाराजगी भी जताई। नेताओं ने आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस ने तत्परता नहीं दिखाई, जिससे मामला और गंभीर हो गया।

प्रदेश में बढ़ते अपराध को बनाया मुद्दा
विपक्ष ने इस घटना को प्रदेश में बढ़ते अपराध और विशेष रूप से दलितों की सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है और इसे लेकर व्यापक स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।

क्या है पूरा मामला
बिरौल थाना क्षेत्र में रविवार रात एक किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात हुई थी। परिजनों ने पीड़िता को एक भूसा घर से बेहोशी की हालत में बरामद किया। आरोप है कि मामले की शिकायत के बावजूद थाने में तैनात दारोगा शमशेर अली खान ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और न ही उच्च अधिकारियों को समय पर सूचना दी।

दबाव के बाद हुई कार्रवाई, लेकिन सवाल बरकरार
मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने गांव के एक युवक नीतीश कुमार शर्मा समेत दो किशोरों को हिरासत में लिया। हालांकि, इस पूरे प्रकरण में लापरवाही बरतने वाले दारोगा के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल लगातार उठ रहे हैं।

आने वाले दिनों में सियासी टकराव के संकेत
इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने के आसार हैं। विपक्ष जहां इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है, वहीं सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर दबाव बढ़ता दिख रहा है।


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